साढ़े पञ्च अक्षरी और करीब एह इंच जगह घेरने और मुश्किल से
तीन से पञ्च सेकंड लेने वाला यह शब्द जेहेन में आते ही कुछ नए पण का हल्का सा स्पंदन दे देता है . पर अगर एस जेहेन में उठने वाली नयेपन की एस तरंग पर कुछ देर ठहरकर सोंचा जाये तो एस साढ़े पञ्च अक्षरी शब्द में व्यष्टि ऐ समष्टि तक का न केवल दृश्य जगत बल्कि मानवी पहुँच से दूर अदृश्य, अलओकिक अत्यंत रहस्यमय और गोपनीय ब्रह्म्मंद तक का दृश्य - अदृश्यसारा ज्ञान समेटे है. व्यक्ति से समष्टि तक का अद्भुत ज्ञान समेटे यह शब्द तरंग अगर भूले भटके भी इंसानी जेहेन से टकरा जाये तो उस टक्कर से उत्पन्न तरंग अपर अगर गौर फरमाया जाये तो मशः अल्लाह एस इंसानी संसार की फितरत ही बदल जाये...
No comments:
Post a Comment